इससे पहले इसी तहसील के ग्राम पंचायत महागौर में भी टीन शेड के अभाव में ग्रामीणों ने चद्दर के अंतिम संस्कार किया था। आदिवासी बाहुल्य इस ग्राम की आवादी 300 के आसपास है। उदयपुर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस ग्राम के लोग सड़क, पानी, बिजली आदि बुनियादी सुविधाओं से बंचित है। एवं इनको स्वास्थ्य, शिक्षा या अन्य कार्य के लिए पहाड़ी और नाले को पार करना पड़ता है। ग्रामवासियों ने बताया कि टीन शैड के अभाव में अंतिम संस्कार करने के लिए वर्षा काल में बारिश थमने तक का इंतजार करना पड़ता है। ग्राम पंचायत के सचिव कोमल प्रसाद विश्वकर्मा ने बताया कि वन ग्राम होने के कारण पंचायत द्वारा कोई प्रयास नहीं किया जाता। इस संबंध में जनपद सीईओ ने बताया कि सैड का निर्माण क्यों नहीं हो पाया इसकी जानकारी नहीं है मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है घर पर हूं। ऑफिस जाते ही बताएंगे।
Saturday, August 5, 2023
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कमर तक पानी में से ले गए अर्थी, बरसते पानी में खुले में हुआ अंतिम संस्कार
कमर तक पानी में से ले गए अर्थी, बरसते पानी में खुले में हुआ अंतिम संस्कार
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mediacentre.in...यानी समय, सत्ता और समाज के बनाए हुए नियम के खिलाफ जाने का मतलब है। सही मायनों में सुधारवाद का वह पथ या रास्ता है। जो अंतिम माना जाता है, लेकिन हम इसे शुरुआत के रूप में ले रहे हैं। सार्थक शुरुआत कितनी कारगर साबित होगी? यह तो भविष्य तय करेगा। फिर भी हम ब्रह्मपथ पर चल पड़े हैं, क्योंकि यह अंतिम पथ नहीं है। सुधारवाद की दिशा में एक छोटा कदम है।.

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