मंडला के निवास की तस्वीर है ये। जहां के मवईमाल गांव में एक महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही थी। परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को इत्तेलाह की एंबुलेंस निकल पड़ी। लेकिन निवास स्वास्थ्य केंद्र से 12 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद मवईमाल से आधा किलोमीटर पहले इसके पहिए थम गए। वजह थी सड़क जो कभी बनी ही नहीं। अब सरकारी दस्तावेज जो भी कहे लेकिन तस्वीर तो झूंठ नहीं बोलती। देख लीजिए क्या हालात है यहां के। इधर विकास के दावे हवा हुए तो उधर प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला की नाजुक हालत को देखते हुए। गांव की महिलाओं ने अपने कंधे के सहारे आधे किलोमीटर का दुष्वारियों भरा सफर तय कर उसे एंबुलेंस तक पहुंचाया।
महिला को अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निवास में भर्ती करा दिया गया है। विकास की दावों की बीच गांव की ये तस्वीर तब है जब हल्की फुल्की बारिश हुई। अंदाजा लगाइए झमाझम बारिश होने के बाद ये गांव कैसे पूरी से हर साल कट जाता होगा। लेकिन इसके बावजूद सड़क से गांव की तस्वीर बदल देने की दाबें करने वालों की नजर में ये गांव शायद है ही नहीं।
Wednesday, March 22, 2023
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गर्भवती महिला को कंधे पर लेकर आधा किलोमीटर चली महिलाएं
गर्भवती महिला को कंधे पर लेकर आधा किलोमीटर चली महिलाएं
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mediacentre.in...यानी समय, सत्ता और समाज के बनाए हुए नियम के खिलाफ जाने का मतलब है। सही मायनों में सुधारवाद का वह पथ या रास्ता है। जो अंतिम माना जाता है, लेकिन हम इसे शुरुआत के रूप में ले रहे हैं। सार्थक शुरुआत कितनी कारगर साबित होगी? यह तो भविष्य तय करेगा। फिर भी हम ब्रह्मपथ पर चल पड़े हैं, क्योंकि यह अंतिम पथ नहीं है। सुधारवाद की दिशा में एक छोटा कदम है।.

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